बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

नवरात्रि(Navratri 2020)

 

नवरात्रि(Navratri 2020) 

नवरात्रि(Navratri 2020) यानी कि नौ रातें. शरद नवरात्र (Sharad Navratri) हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक हैं जिसे दुर्गा पूजा (Durga Puja) के नाम से भी जाना जाता है.इस बार शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू होकर 25 अक्‍टूबर तक है। नवरात्रि में 9 दिन तक माता के अलग-अलग रूपों में पुजा की जाती है।



नवरात्रि पर ज्वारे का महत्व 

नवरात्रि पर ज्वारे उगाए जाते हैं। घट स्थापना के ही दिन माता की चौकी के सामने ज्वार बोएं जाते हैं। मान्यता है नवरात्रि पर जौ बोना बहुत ही शुभ होता है। कलश के सामने मिट्टी के पात्र में जौ को बोया जाता है। नवरात्रि में जौ इसलिए बोया जाता है क्योंकि सृष्टि की शुरुआत में जौ ही सबसे पहली फसल थी। साथ ही ऐसी मान्यता है कि जौ उगने या न उगने को भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान के तौर पर देखा जाता है । अगर जौ तेज़ी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है। अगर ये बढ़ते नहीं और मुरझाए हुए रहते हैं तो भविष्य में किसी तरह के अनिष्ट का संकेत देते हैं।




पर्यावरण (Environment)


🌳पर्यावरण (Environment)🌳

म्पर्ण जीवों का अस्तित्व पर्यावरण पर निर्भर हैं। शुद्ध,स्वस्थ्य और सुरक्षित पर्यावरण के बिना किसी भी प्राणी का जीवन सम्भव नहीं हैं। इस लिए हमारे चारो के पर्यावरण को बचाना हो और सुरक्षित रखना हम सब की जिम्मेंदारी हैं। पर्यावरण को बचाने का संदेश और लोगों को जागरूक करनें के लिए प्रतिवर्ष ’’5 जून को विश्व में विश्व पर्यावरण दिवस’’ मनाया जाता हैं।





पर्यावरण को बचानें के लिए हम सब को सकल्प लेना चाहिए कि:-

1. पेड़-पौधों को की अवैध कटाई नहीं करना चाहिए और अधिक से अधिक पेड़ लगाना चाहिए।
2. हमारें आप-पास प्राकृृत जगलों को बचाना चाहिए।
3. नदीं, नालों,तालाबों,झीलों आदि को सुरक्षित रखना चाहिए और इनको प्रदुषित होने से बचाना चाहिए।
4. अपने आस-पास साफ सफाई को का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
5. कुडा-कचारा को हमेशा डष्टबीन में ही डालना चाहिए और अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए।
6. बीजली का अनावश्यक उपयोंग नही करना चाहिए। बल्ब,पंखे,एसी आदि विधुत के उपकरणों को उपयोग के बाद तुरन्त बन्द करें, जिससे प्रदुषण से बचा जा सकता हैं। 

7. सभी जीव-जन्तुओं के प्रति दया भाव रखना चाहिए।
8. पोलिथिन/पलास्टिक का ऐसी उपयोंग बन्द कर, कागज से बने बैग,थैले कें उपयोग को अधिक से अधिक बढ़ावा देना चाहिए।




                                    🖋️ रामकिशोर मीणा
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शुक्रवार, 1 मई 2020

भारतीय संविधान सभा से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य और जानकारी

भारतीय संविधान सभा से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य और जानकारी

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है। संविधान सभा की ओर से 26 नंवबर 1949 को भारत का संविधान पारित हुआ और 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ. भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है. भारतीय संविधान में वर्तमान समय में 465 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 22 भागों में विभाजित है. आइए जानते हैं हमारे संविधान से जुड़े कई रोचक तथ्य...
1. बाबासाहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर को भारत का संविधान निर्माता कहा जाता है. वे संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष थे.
2. अंबेडकर को संविधान का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे.
3. पूरे देश में 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है.
4. देश का सर्वोच्‍च कानून हमारा संविधान 26 नवंबर, 1949 में अंगीकार किया गया था.
5. संविधान सभा पर अनुमानित खर्च 1 करोड़ रुपये आया था.
6. मसौदा लिखने वाली समिति ने संविधान हिंदी, अंग्रेजी में हाथ से लिखकर कैलिग्राफ किया था और इसमें कोई टाइपिंग या प्रिंटिंग शामिल नहीं थी.
7. संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे. जवाहरलाल नेहरू, डॉ भीमराव अम्बेडकर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे.
8. 11 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की बैठक में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया, जो अंत तक इस पद पर बने रहें.
9. इसमें अब 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है. इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं.
10. संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता को मंत्रिपरिषद् होगी, जिसका प्रमुख पीएम होगा.
11. आज से ठीक 66 साल पहले भारतीय संविधान तैयार करने और स्वीकारने के बाद से इसमें पूरे 100 संशोधन किए जा चुके हैं.
12. संविधान में प्रशासन या सरकार के अधिकार, उसके कर्तव्य और नागरिकों के अधिकार को विस्तार से बताया गया है.
13. संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कतिपय एकात्‍मक विशिष्‍टताओं सहित संघीय हो. केन्‍द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख राष्‍ट्रपति है.
14. भारत की संविधान सभा का चुनाव भारतीय संविधान की रचना के लिए किया गया था. ग्रेट ब्रिटेन से स्वतंत्र होने के बाद संविधान सभा के सदस्य ही प्रथम संसद के सदस्य बने.
15. कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों के आधार पर भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन जुलाई, 1946 ई० में किया गया.
16. संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 निश्चित की गई थी, जिनमें 292 ब्रिटिश प्रांतों के प्रतिनिधि, 4 चीफ कमिश्नर क्षेत्रों के प्रतिनिधि एवं 93 देशी रियासतों के प्रतिनिधि थे.
17. हैदराबाद एक ऐसी रियासत थी, जिसके प्रतिनिधि संविधान सभा में सम्मिलित नहीं हुए थे.
19. संविधान के प्रारूप पर कुल 114 दिन बहस हुई.
20. संविधान के कुछ अनुच्छेदों में से 15 अर्थात 5, 6, 7, 8, 9, 60, 324, 366, 367, 372, 380, 388, 391, 392 तथा 393 अनुच्छेदों को 26 नवंबर, 1949 ई० को ही परिवर्तित कर दिया गया; जबकि शेष अनुच्छेदों को 26 जनवरी, 1950 ई० को लागू किया गया.
21. समाजवादी शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया.
भारतीय संविधान के प्रमुख भाग इस प्रकार हैं-
भाग-1 संघ एवं उसका राज्य क्षेत्र: अनुच्छेद 1 से 4
भाग-2 नागरिकता: अनुच्छेद 5 से 11
भाग-3 मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 12 से 35
भाग-4 नीति-निर्देशक तत्‍व: अनुच्छेद 36 से 51
भाग-4 (क) मूल कर्तव्‍य: अनुच्छेद 51 (क)
भाग-5 संघ: अनुच्छेद 52 से 151
भाग-6 राज्य: अनुच्छेद 152 से 237
भाग-8 संघ राज्य क्षेत्र: अनुच्छेद 239 से 242
भाग-11 संघ और राज्यों के बीच संबंध: अनुच्छेद 245 से 263
भाग-14 संघ और राज्यों के अधीन सेवाएं: अनुच्छेद 308 से 323
भाग-15 निर्वाचन: अनुच्छेद 324 से 329
भाग-17 राजभाषा: अनुच्छेद 343 से 351
भाग-18 आपात उपबंध: अनुच्छेद 352 से 360
भाग-20 संविधान संशोधन: अनुच्छेद 368

के संविधान के बारे में जानकारी आपको कैसी लगी
कमेंट करके बताएं। क

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जीवन -परिचय

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जीवन -परिचय

डॉ भीमराव अम्बेडकर  प्रारंभिक जीवन - 


भीमराव अंबेडकर भीमबाई के पुत्र थे और रामजी का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू सेना छावनी, मध्य प्रांत में  हुआ था।   उनके पिता भारतीय सेना में सूबेदार थे। 1894 में उनके पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद उनका परिवार सतारा चला गया। कुछ ही समय बाद, उनकी माँ का निधन हो गया और बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने की।
बाबा साहेब अम्बेडकर उनके दो भाई बलराम और आनंद राव और दो बहनें मंजुला और तुलसा बच गए। और सभी बच्चों में से केवल अम्बेडकर ही उच्च विद्यालय गए थे। उनकी माँ के निधन के चार साल बाद, उनके पिता ने फिर से शादी की और परिवार बंबई चला गया। 

डॉ भीमराव अंबेडकर की शिक्षा -

प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने में बहुत संघर्ष करना पड़ा। लेकिन उनका पढ़ने में बहुत रुचि थी और समाज के लिए कुछ करने की ललक थी इसलिए आगे पढ़ाई जारी रखी। मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 1908 में एल्फिंस्टन कॉलेज में दाखिला मिला। उनकी सफलता अछूतों के लिए जश्न मनाने का एक कारण थी क्योंकि वह ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने 1912 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में अपनी डिग्री हासिल की। जून 1915 में उन्होंने अर्थशास्त्र और अन्य विषयों में इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शन और राजनीति में मास्टर डिग्री प्राप्त की। 
अपने अथक प्रयासों और समर्पण के साथ अपने बचपन की कठिनाइयों और गरीबी के बावजूद डॉ. बी आर अंबेडकर ने अपनी पीढ़ी के सर्वोच्च शिक्षित भारतीय बन गए। वह विदेश में अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे।
जातिगत भेदभाव और छुआछूत से मुक्ति -
अपने प्रारंभिक जीवन में वे जातिगत भेदभाव और छुआछूत के शिकार थे, उन्होंने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और सफलता की ऊंचाइयों को हासिल करने के लिए संघर्ष किया और जातिगत भेदभाव और छुआछूत के शिकार कई लोगों की आवाज़ बने। वह महिलाओं सहित हाशिए के समुदायों के अधिकारों के लिए खड़े थे। वे अछूतों और अन्य पिछड़ी जाति के लोगों के प्रवक्ता थे। वह शोषित लोगों के रक्षक थे और जाति और धार्मिक बाधाओं के बंधनों से समानता की मुक्ति के लिए लगातार प्रयास किए। वह आधुनिक भारतीय नागरिक थे जिन्होंने लोगों के समग्र विकास और भलाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
अम्बेडकर ने सार्वजनिक स्थानों पर पानी का उपयोग करने के लिए अछूतों के अधिकारों के लिए सत्याग्रह शुरू किया। आंदोलन में भाग लेने के लिए दलित समुदाय के कई लोग आगे आए। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने हिंदू जाति व्यवस्था के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रहार किया। 
उन्होंने सत्याग्रह के दौरान दलित महिलाओं का भी उल्लेख किया और उनसे सभी पुराने रीति-रिवाजों को त्यागने और उच्च जाति की भारतीय महिलाओं की तरह साड़ी पहनने की अपील की। महाद में अम्बेडकर के भाषण के बाद, दलित महिलाओं को उच्च वर्ग की महिलाओं की तरह अपनी साड़ियों को पहनने के लिए प्रभावित किया गया। इंडियाबेरिया चित्रे और लक्ष्मीबाई टिपनिस जैसी उच्च वर्ग की महिलाओं ने इन दलित महिलाओं को उच्च वर्ग की महिलाओं की तरह साड़ी पहनने में मदद की।

डॉ भीमराव अंबेडकर का राजनीतिक जीवन -

आंबेडकर का राजनीतिक जीवन1926 में शुरू हुआ और 1956 तक वो राजनीतिक क्षेत्र में विभिन्न पदों पर रहे। दिसंबर 1926 में, बॉम्बे के गवर्नर ने उन्हें बॉम्बे विधान परिषद के सदस्य के रूप में नामित किया; उन्होंने अपने कर्तव्यों को गंभीरता से लिया ।
1936 में, आम्बेडकर ने स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की, जो 1937 में केन्द्रीय विधान सभा चुनावों मे 13 सीटें जीती।आम्बेडकर को बॉम्बे विधान सभा के विधायक के रूप में चुना गया था। वह 1942 तक विधानसभा के सदस्य रहे और इस दौरान उन्होंने बॉम्बे विधान सभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी कार्य किया।
डॉ भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माता और शिल्पकार माना जाता है. उन्हें 29 अगस्त 1947 को संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया था. उनका मानना ​​था कि विभिन्न वर्गों के बीच अंतर को बराबर करना महत्वपूर्ण था, अन्यथा देश की एकता को बनाए रखना बहुत मुश्किल होगा।



                     
                     🖋️- R.K.MEENA
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

कोराना वाइरस (COVID-19) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी

कोराना वाइरस (COVID-19) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।

   कोरोना वाइरस (COVID-19) - कोविड-19 कोरोना वायरस महामारी पूरे विश्व में आग की तरह फैल रही है इसे रोकने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारें अपना शत-प्रतिशत कार्य कर रही है लेकिन कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और इस बीमारी को बढ़ाने में बल दे रहे जो हमारे देश के लिए बहुत ही खतरा है। कोरोना वायरस किसी जाति, धर्म को देखकर नहीं लगता है अतः हिंदुस्तान को एकजुटता दिखा कर  ही लड़ जा सकता है।

      माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा भारत में जनता कर्फ्यू , प्रकाश उत्सव के रूप में मना कर विश्व में एकजुटता की मिसाल कायम की है। जिसका पुरा श्रेय हिंदुस्तान की जनता को जाता है।
      राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार इस वायरस को लेकर बहुत सतर्क है और कई कठोर निर्णय सरकार द्वारा दिए गए हैं। जिसकी प्रशंसा माननीय प्रधानमंत्री और कई राज्य सरकारों ने भी की है।  राजस्थान की जनता को सरकार के निर्णयों की शत-प्रतिशत पालना करना आवश्यक है। तब जाकर हम इस महामारी से विजय प्राप्त कर सकते हैं।
हमारे सभी जन-प्रतिनिधि, अधिकारी /कर्मचारी, सैनिक, पुलिस, चिकित्सा कर्मी, मिडिया कर्मी, सफाई कर्मचारी दिन रात अपनी जान की परवाह करें बीना 24 घंटे सेवा में तत्पर लगे हुए हैं। इन सब का हमको तहे दिल से सम्मान,आदर और इनका हौसला अफजाई करना चाहिए।
  राजस्थान के सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट कंपनी कर्मचारी, बड़े-बड़े उद्योगपति और कई भामाशाह अपने सामर्थ्य अनुसार इस महामारी से लड़ने के लिए तह दिल से किसी ने किसी प्रकार से अपना योगदान दे रहे हैं। कोई भी गरीबी जो प्रतिदिन कमाता और खाता है था ऐसा कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोए यह उद्देश्य सरकार का है जिसमें सभी लोग धन,खाने के पैकेट, सुखा राशन लोगों तक निरंतर पहुंचाए जा रहा है। लेकिन कई जगह से खबरें आ रही है की सक्षम लोग भी भामाशाह व सरकार द्वारा वितरण किए जा रहे हैं खाने के पैकेट या सुखा राशन नहीं मिलने की शिकायतें कंट्रोल रूम पर की जाती है जब फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाता है तो वह परिपूर्ण रूप से सम्पन्न लोग होते हैं। जो बिल्कुल गलत है।
सरकार और सभी अधिकारी/ कर्मचारी अपने स्तर पर इस महामारी से छुटकारा पाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इसके लिए हर व्यक्ति को स्वयं प्रेरित होकर जागरूक होने की आवश्यकता है ।
1- सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी सख्ती से पालना की जाएगी।
2- सभी अपने घर पर रहे।
3- हमेशा मास्क का उपयोग करें।
4- खांसते, छिकते समय टिशू पेपर कुमार का उपयोग करें।
5- 15-20 मिनट के अंतराल में अपने हाथों को साबुन से रगड़ रगड़ कर  20 से 30 सैकंड धोएं।

🙏 घर में रहे, जागरूक रहें, सुरक्षित, स्वस्थ रहें 🙏


को - कोई
रो  - रोड़ पर
ना - ना निकले।
।। कोरोना से लड़ेगा इण्डिया, जितेगा इण्डिया।।
# राजस्थान सतर्क है
                                           🖋️ रामकिशोर मीणा

रविवार, 5 अप्रैल 2020

कोराना वाइरस से बचाव के उपाय

कोराना वाइरस से बचाव के उपाय

     कोराना वायरस पूरे विश्व में एक महामारी के रूम में फैल रहा है विश्व के बड़े-बड़े देश चीन,ईरान, इटली, अमेरिका आदि शक्तिशाली एवं विकसित देश भी इस महामारी का इलाज ढूंढने मैं कामयाब नहीं हो पाए है। इस महामारी से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग इस बीमारी से संक्रमित हैं।
अतः समस्त देशवासी और प्रदेश वासी केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की एडवाइजरी या दिशा निर्देशों की पालना स्वयं प्रेरित होकर करें। इसी में सब लोगों की भलाई है। और स्वयं, अपने परिवार,अपने पड़ोसी, रिश्तेदारों, आमजन को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।
कोराना महामारी से बचाव के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए -
1. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की एडवाइजरी या दिशा निर्देशों की पालना स्वयं प्रेरित होकर करें। 
2. अपने घर में रहे, सुरक्षित रहें, बिना कारण घर से बाहर नहीं निकले।
3. कम से कम हर आधा घंटा में अपने हाथों को साबुन से कम से कम 20 मिनट तक निरंतर धोएं।
4. खांसते और सीखते समय रुमाल या टिशु पेपर का इस्तेमाल करें।
5. लोगों से मिलना जुलना बंद करें एवं आवश्यक हो तो कम से कम 1 मीटर दूर रहकर बात करें।
6. खांसी, तेज बुखार, जुखाम आदि के लक्षण होने पर तुरंत प्रभाव से डॉक्टर को दिखाएं।
7. किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाएं और अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे।
                  धन्यवाद।।
                                                   R.K.Meena

शनिवार, 4 अप्रैल 2020

भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण जानकारियां

भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे। संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 में अपना काम पूरा कर लिया और 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ। इसी दिन कि याद में हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। 

क्या आप अपने सालों पुराने बैंक खातों में पैसे रखकर भूल गए हैं? अब आया याद तो निकालें कैसे? RBI ने बताया तरीका

  क्या आप अपने  सालों   पुराने बैंक खातों में पैसे रखकर भूल गए हैं?  अब आया याद तो निकालें कैसे? RBI ने बताया तरीका भा रतीय रिजर्व बैंक के न...