अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
( International Women's Day)
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को को मनाया जाता है। महिलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान तथा उपलब्धियों को पहचान दिलाने के लिए यह हर वर्ष मनाया जाता है।
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब पुरुष युद्ध पर थे, तब महिलाएं भोजन की कमी से जूझ रही थी। सरकारें भी उनकी बात नहीं सुन रही थी इसलिए 8 मार्च 1917 में हजारों रूसी महिलाओं ने बदलाव की मांग करते हुए सड़कों पर उतरीं। तब रूस ने 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को आधिकारिक अवकाश घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधिकारिक बनाने के लिए 1975 में 8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तब से हर वर्ष 8 मार्च "अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस " मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र 1996 में इस दिन को नई थीम के साथ मनाया, पहली बार महिला दिवस की थीम "अतीत का जश्न, भविष्य के लिए योजना बनाना" थी।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की आवश्यकता नहीं होती यदि महिलाओं की स्थिति प्रारम्भ से ही सही होती। अभी भी शायद ही कुछ लोग इस दिवस के बारे में जानकारी रखते होंगे, इतने सालों में न जाने कितने बार हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मन चुके हैं पर सच्चाई तो यही है की महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों में कोई परिवर्तन विशेष रूप से आया हो। भारत ही नहीं अन्य विकसित देशों की महिलाओं की स्थिति कुछ ऐसे ही दिखाई पड़ती हैं किन्तु कहा जा सकता है की समयानुसार वहां पहले की तुलना में महिलाओं का अच्छा खासा महत्त्व है उनके सामजिक और शैक्षिक दृष्टि से उत्थान हुआ है समय-समय पर महिलाओं ने देश की उन्नति में अपना विशेष महत्त्व दिया है। भारत में कुछ हद तक महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन आया है पर यह काफी नहीं है।
आज भारत ही नही पुरे विश्व की महिलाये किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नही है आज महिलाये राजनीति, व्यापार, खेल, विज्ञान, कला,सगीत आदि में अपना लोहा मनवा रही है ।
इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है “डिजिटऑल: लैंगिक समानता के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार” है, जो हम सभी को लैंगिक पूर्वाग्रह और असमानता को चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित करती है, जहाँ भी हम इसे देखते हैं। हमारी दुनिया में लैंगिक असमानता एक व्यापक समस्या बनी हुई है, और महिलाओं को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मनाने का मंतव्य यही था कि महिलाओं को उनकी क्षमता प्रदान की जाए तथा महिला सशक्तिकरण किया जाए। मानसिकता कहें या जड़ता, कहीं न कहीं पुरुष महिलाओ को अपने से नीचा समझता आया है इस मानसिकता में परिवर्तन करना बहुत जरुरी था और यह केवल महिलाओं को बेहतर अवसर प्रदान करके ही किया जा सकता था।
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