सोमवार, 13 अप्रैल 2020

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जीवन -परिचय

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जीवन -परिचय

डॉ भीमराव अम्बेडकर  प्रारंभिक जीवन - 


भीमराव अंबेडकर भीमबाई के पुत्र थे और रामजी का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू सेना छावनी, मध्य प्रांत में  हुआ था।   उनके पिता भारतीय सेना में सूबेदार थे। 1894 में उनके पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद उनका परिवार सतारा चला गया। कुछ ही समय बाद, उनकी माँ का निधन हो गया और बच्चों की देखभाल उनकी चाची ने की।
बाबा साहेब अम्बेडकर उनके दो भाई बलराम और आनंद राव और दो बहनें मंजुला और तुलसा बच गए। और सभी बच्चों में से केवल अम्बेडकर ही उच्च विद्यालय गए थे। उनकी माँ के निधन के चार साल बाद, उनके पिता ने फिर से शादी की और परिवार बंबई चला गया। 

डॉ भीमराव अंबेडकर की शिक्षा -

प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने में बहुत संघर्ष करना पड़ा। लेकिन उनका पढ़ने में बहुत रुचि थी और समाज के लिए कुछ करने की ललक थी इसलिए आगे पढ़ाई जारी रखी। मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 1908 में एल्फिंस्टन कॉलेज में दाखिला मिला। उनकी सफलता अछूतों के लिए जश्न मनाने का एक कारण थी क्योंकि वह ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने 1912 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में अपनी डिग्री हासिल की। जून 1915 में उन्होंने अर्थशास्त्र और अन्य विषयों में इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शन और राजनीति में मास्टर डिग्री प्राप्त की। 
अपने अथक प्रयासों और समर्पण के साथ अपने बचपन की कठिनाइयों और गरीबी के बावजूद डॉ. बी आर अंबेडकर ने अपनी पीढ़ी के सर्वोच्च शिक्षित भारतीय बन गए। वह विदेश में अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे।
जातिगत भेदभाव और छुआछूत से मुक्ति -
अपने प्रारंभिक जीवन में वे जातिगत भेदभाव और छुआछूत के शिकार थे, उन्होंने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और सफलता की ऊंचाइयों को हासिल करने के लिए संघर्ष किया और जातिगत भेदभाव और छुआछूत के शिकार कई लोगों की आवाज़ बने। वह महिलाओं सहित हाशिए के समुदायों के अधिकारों के लिए खड़े थे। वे अछूतों और अन्य पिछड़ी जाति के लोगों के प्रवक्ता थे। वह शोषित लोगों के रक्षक थे और जाति और धार्मिक बाधाओं के बंधनों से समानता की मुक्ति के लिए लगातार प्रयास किए। वह आधुनिक भारतीय नागरिक थे जिन्होंने लोगों के समग्र विकास और भलाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
अम्बेडकर ने सार्वजनिक स्थानों पर पानी का उपयोग करने के लिए अछूतों के अधिकारों के लिए सत्याग्रह शुरू किया। आंदोलन में भाग लेने के लिए दलित समुदाय के कई लोग आगे आए। डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने हिंदू जाति व्यवस्था के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रहार किया। 
उन्होंने सत्याग्रह के दौरान दलित महिलाओं का भी उल्लेख किया और उनसे सभी पुराने रीति-रिवाजों को त्यागने और उच्च जाति की भारतीय महिलाओं की तरह साड़ी पहनने की अपील की। महाद में अम्बेडकर के भाषण के बाद, दलित महिलाओं को उच्च वर्ग की महिलाओं की तरह अपनी साड़ियों को पहनने के लिए प्रभावित किया गया। इंडियाबेरिया चित्रे और लक्ष्मीबाई टिपनिस जैसी उच्च वर्ग की महिलाओं ने इन दलित महिलाओं को उच्च वर्ग की महिलाओं की तरह साड़ी पहनने में मदद की।

डॉ भीमराव अंबेडकर का राजनीतिक जीवन -

आंबेडकर का राजनीतिक जीवन1926 में शुरू हुआ और 1956 तक वो राजनीतिक क्षेत्र में विभिन्न पदों पर रहे। दिसंबर 1926 में, बॉम्बे के गवर्नर ने उन्हें बॉम्बे विधान परिषद के सदस्य के रूप में नामित किया; उन्होंने अपने कर्तव्यों को गंभीरता से लिया ।
1936 में, आम्बेडकर ने स्वतंत्र लेबर पार्टी की स्थापना की, जो 1937 में केन्द्रीय विधान सभा चुनावों मे 13 सीटें जीती।आम्बेडकर को बॉम्बे विधान सभा के विधायक के रूप में चुना गया था। वह 1942 तक विधानसभा के सदस्य रहे और इस दौरान उन्होंने बॉम्बे विधान सभा में विपक्ष के नेता के रूप में भी कार्य किया।
डॉ भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माता और शिल्पकार माना जाता है. उन्हें 29 अगस्त 1947 को संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया था. उनका मानना ​​था कि विभिन्न वर्गों के बीच अंतर को बराबर करना महत्वपूर्ण था, अन्यथा देश की एकता को बनाए रखना बहुत मुश्किल होगा।



                     
                     🖋️- R.K.MEENA
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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

कोराना वाइरस (COVID-19) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी

कोराना वाइरस (COVID-19) के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी।

   कोरोना वाइरस (COVID-19) - कोविड-19 कोरोना वायरस महामारी पूरे विश्व में आग की तरह फैल रही है इसे रोकने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारें अपना शत-प्रतिशत कार्य कर रही है लेकिन कुछ लोग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और इस बीमारी को बढ़ाने में बल दे रहे जो हमारे देश के लिए बहुत ही खतरा है। कोरोना वायरस किसी जाति, धर्म को देखकर नहीं लगता है अतः हिंदुस्तान को एकजुटता दिखा कर  ही लड़ जा सकता है।

      माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा भारत में जनता कर्फ्यू , प्रकाश उत्सव के रूप में मना कर विश्व में एकजुटता की मिसाल कायम की है। जिसका पुरा श्रेय हिंदुस्तान की जनता को जाता है।
      राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार इस वायरस को लेकर बहुत सतर्क है और कई कठोर निर्णय सरकार द्वारा दिए गए हैं। जिसकी प्रशंसा माननीय प्रधानमंत्री और कई राज्य सरकारों ने भी की है।  राजस्थान की जनता को सरकार के निर्णयों की शत-प्रतिशत पालना करना आवश्यक है। तब जाकर हम इस महामारी से विजय प्राप्त कर सकते हैं।
हमारे सभी जन-प्रतिनिधि, अधिकारी /कर्मचारी, सैनिक, पुलिस, चिकित्सा कर्मी, मिडिया कर्मी, सफाई कर्मचारी दिन रात अपनी जान की परवाह करें बीना 24 घंटे सेवा में तत्पर लगे हुए हैं। इन सब का हमको तहे दिल से सम्मान,आदर और इनका हौसला अफजाई करना चाहिए।
  राजस्थान के सरकारी कर्मचारी, प्राइवेट कंपनी कर्मचारी, बड़े-बड़े उद्योगपति और कई भामाशाह अपने सामर्थ्य अनुसार इस महामारी से लड़ने के लिए तह दिल से किसी ने किसी प्रकार से अपना योगदान दे रहे हैं। कोई भी गरीबी जो प्रतिदिन कमाता और खाता है था ऐसा कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोए यह उद्देश्य सरकार का है जिसमें सभी लोग धन,खाने के पैकेट, सुखा राशन लोगों तक निरंतर पहुंचाए जा रहा है। लेकिन कई जगह से खबरें आ रही है की सक्षम लोग भी भामाशाह व सरकार द्वारा वितरण किए जा रहे हैं खाने के पैकेट या सुखा राशन नहीं मिलने की शिकायतें कंट्रोल रूम पर की जाती है जब फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाता है तो वह परिपूर्ण रूप से सम्पन्न लोग होते हैं। जो बिल्कुल गलत है।
सरकार और सभी अधिकारी/ कर्मचारी अपने स्तर पर इस महामारी से छुटकारा पाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इसके लिए हर व्यक्ति को स्वयं प्रेरित होकर जागरूक होने की आवश्यकता है ।
1- सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी सख्ती से पालना की जाएगी।
2- सभी अपने घर पर रहे।
3- हमेशा मास्क का उपयोग करें।
4- खांसते, छिकते समय टिशू पेपर कुमार का उपयोग करें।
5- 15-20 मिनट के अंतराल में अपने हाथों को साबुन से रगड़ रगड़ कर  20 से 30 सैकंड धोएं।

🙏 घर में रहे, जागरूक रहें, सुरक्षित, स्वस्थ रहें 🙏


को - कोई
रो  - रोड़ पर
ना - ना निकले।
।। कोरोना से लड़ेगा इण्डिया, जितेगा इण्डिया।।
# राजस्थान सतर्क है
                                           🖋️ रामकिशोर मीणा

रविवार, 5 अप्रैल 2020

कोराना वाइरस से बचाव के उपाय

कोराना वाइरस से बचाव के उपाय

     कोराना वायरस पूरे विश्व में एक महामारी के रूम में फैल रहा है विश्व के बड़े-बड़े देश चीन,ईरान, इटली, अमेरिका आदि शक्तिशाली एवं विकसित देश भी इस महामारी का इलाज ढूंढने मैं कामयाब नहीं हो पाए है। इस महामारी से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग इस बीमारी से संक्रमित हैं।
अतः समस्त देशवासी और प्रदेश वासी केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की एडवाइजरी या दिशा निर्देशों की पालना स्वयं प्रेरित होकर करें। इसी में सब लोगों की भलाई है। और स्वयं, अपने परिवार,अपने पड़ोसी, रिश्तेदारों, आमजन को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।
कोराना महामारी से बचाव के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए -
1. केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की एडवाइजरी या दिशा निर्देशों की पालना स्वयं प्रेरित होकर करें। 
2. अपने घर में रहे, सुरक्षित रहें, बिना कारण घर से बाहर नहीं निकले।
3. कम से कम हर आधा घंटा में अपने हाथों को साबुन से कम से कम 20 मिनट तक निरंतर धोएं।
4. खांसते और सीखते समय रुमाल या टिशु पेपर का इस्तेमाल करें।
5. लोगों से मिलना जुलना बंद करें एवं आवश्यक हो तो कम से कम 1 मीटर दूर रहकर बात करें।
6. खांसी, तेज बुखार, जुखाम आदि के लक्षण होने पर तुरंत प्रभाव से डॉक्टर को दिखाएं।
7. किसी भी प्रकार की अफवाह न फैलाएं और अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे।
                  धन्यवाद।।
                                                   R.K.Meena

शनिवार, 4 अप्रैल 2020

भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण जानकारियां

भारतीय संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे। संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 में अपना काम पूरा कर लिया और 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ। इसी दिन कि याद में हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। 

भारत के संविधान की महत्वपूर्ण जानकारियां

भारत का संविधान,भारत का  सर्वोच्च विधान है जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। यह दिन (26 नवम्बर) भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है।

26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ। इसी दिन कि याद में हम हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। भारतीय संविधान को पूर्ण रूप से तैयार करने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन का समय लगा था।

क्या आप अपने सालों पुराने बैंक खातों में पैसे रखकर भूल गए हैं? अब आया याद तो निकालें कैसे? RBI ने बताया तरीका

  क्या आप अपने  सालों   पुराने बैंक खातों में पैसे रखकर भूल गए हैं?  अब आया याद तो निकालें कैसे? RBI ने बताया तरीका भा रतीय रिजर्व बैंक के न...